शिक्षक दिवस पर सबसे प्रथम गुरु माँ को समर्पित

💐*मेरी माँ मेरी गुरु*💐

जीवन की इस नदिया का
तुम तो एक किनारा हो।
मेरी इस जीवन नैय्या का
तुम ही एक सहारा हो।।

जब जब घिरा मुसीबत में
केवल याद तुम्हारी आयी ।
मुझको हर कदम कदम पर
केवल तुम्ही पड़ी दिखलाई।।

जो कुछ मिला है मुझको,
सब तो तुमसे ही पाया है।
मेरा कोई अस्तित्व नही है,
अस्तित्व तुम्ही से पाया है।।

जग में आने का सौभग्य दिया,
मातृ भूमि पर मिट जाने का ज्ञान दिया।
हे जन्मदात्री,ईश भी तुझको नमन करे है,
पथ प्रदर्शक बनके तुमने ही कल्याण किया।।

गुरु दक्षिणा देकर मैं,
गुरु के ऋण तो चुका दूंगा।
ज्ञान का आलोक फैलाकर,
मैं भारत का नाम बढा दूंगा।।
पर हे जननी तेरा ऋण मैं कैसे चुकाऊंगा,
जब भी मुझको जन्म मिले मैं गोद तेरी ही चाहूँगा।।

©®स्वराचित
सूरज तिवारी 'रूद्र'
कनावां फैज़ाबाद उ.प्र.
मोबाइल नंबर-9198389039
5/9/2017

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